Posted on
  • Thursday, February 2, 2012
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • in
  • बस से उतरकर.. जेब में हाथ डाला, मैं चौंक पड़ा.., जेब कट
    चुकी थी..। जेब में.. था भी क्या..? कुल 150 रुपए और एक
    खत..!! जो मैंने अपनी माँ को लिखा था कि -

    मेरी नौकरी छूट गई है; अभी पैसे नहीं भेज पाऊँगा…। तीन
    दिनों से.. वह पोस्टकार्ड मेरी जेब म...ें पड़ा था। पोस्ट..
    करने को.. मन ही.. नहीं कर रहा था। 150 रुपए जा चुके
    थे..। यूँ ......150 रुपए ..कोई बड़ी रकम नहीं थी., लेकिन..
    जिसकी नौकरी छूट चुकी हो, उसके लि...ए.. 150 रुपए..
    1500 सौ से कम.. नहीं होते..!! कुछ दिन गुजरे...।
    माँ का खत मिला..। पढ़ने से पूर्व.. मैं सहम गया..। जरूर.. पैसे
    भेजने.. को लिखा होगा..। …लेकिन, खत पढ़कर.. मैं हैरान..
    रह गया। माँ ने लिखा था — “बेटा, तेरा 500 रुपए का..
    भेजा हुआ मनीआर्डर.. मिल गया है। तू कितना अच्छा है रे !
    …पैसे भेजने में.. कभी लापरवाही.. नहीं बरतता..।” मैं इसी..
    उधेड़- बुन में लग गया.. कि आखिर.. माँ को मनीआर्डर..
    किसने भेजा होगा..? कुछ दिन बाद., एक और पत्र मिला..।
    चंद लाइनें.. लिखी थीं—आड़ी- तिरछी..। बड़ी मुश्किल से
    खत पढ़ पाया..। लिखा था — “भाई, 150 रुपए तुम्हारे..
    और 350 रुपए अपनी ओर से मिलाकर मैंने तुम्हारी माँ को..
    मनीआर्डर.. भेज दिया है..। फिकर.. न करना।
    माँ तो सबकी.. एक- जैसी ही होती है न..!! वह
    क्यों भूखी रहे...?? तुम्हारा— जेबकतरा भाई..!!!
    दुनियां में.. आज भी.. माँ को प्यार.. करने वाले.. ऐसे
    इन्सान.. हैं..!!!
    See More

    साभार : Facebook.com

    8 comments:

    रविकर said...

    क्या आपकी उत्कृष्ट-प्रस्तुति

    शुक्रवारीय चर्चामंच

    की कुंडली में लिपटी पड़ी है ??

    charchamanch.blogspot.com

    amrendra "amar" said...

    Sach Maa ek jaisi hi hoti hai Maa jaisi hi.bahut umd abhavpurn prastuti ke liye badhai

    amrendra "amar" said...
    This comment has been removed by the author.
    Piush Trivedi said...

    बढ़िया लेख इसे भी देखे :- http://hindi4tech.blogspot.com

    sangita said...

    सुन्दर व् सार्थक पोस्ट है |

    dheerendra said...

    बेहतरीन सार्थक लेख ,लाजबाब कमाल की प्रस्तुती

    my new post...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

    रविकर said...

    आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज charchamanch.blogspot.com par है |

    DR. ANWER JAMAL said...

    Shukriya aap sabhi ka.

    There was an error in this gadget

    Followers

    प्यारी माँ

    Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
    • विश्वास - ‘विश्वास’ कितना आभासी है ना यह शब्द ! कितना क्षणिक, कितना छलनामय, कितना भ्रामक ! विश्वास के जिस धागे से बाँध कर कल्पना की पतंग को आसमान की ऊँच...
    • राजीव गांधी :अब केवल यादों में - शत शत नमन - एक नमन राजीव जी को आज उनकी जयंती के अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि ...
    • हमें अपनी झील के आकर्षण में बंधे रहना है - #हिन्दी_ब्लागिंग मैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा बना रहे हैं। कहाँ ...
    • शापित मंजिलें - *... स्थितियाँ * *बदल देती हैं * *राह जिंदगी की ...* *... मंजिलें* *अक्सर अकेली रह * *शापित हो जाया करती हैं !!* *सु-मन *
    • बातें हैं बातों का क्या ....... - अम्बुआ की डाली पर चाहे न कुहुके कोयल किसी अलसाई शाम से चाहे न हो गुफ्तगू कोई बेनामी ख़त चाहे किसी चौराहे पर क्यों न पढ़ लिया जाए ज़िन्दगी का कोई नया शब्दक...
    • केवल राष्ट्र के लिए था यह सृजन - देश की स्वतंत्रता के लिए 1857 से लेकर 1947 तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों, कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय...
    • कृष्ण लीला - ग्वाल बाल साथ ले कान्हा ने धूम मचाई गोकुल की गलियों में ! खिड़की खुली थी घर में छलांग लगाई खाया नवनीत खिलाया मित्रों को भी कुछ खाया कुछ फैलाया आहट ...
    • नींद बनाम ख्व़ाब - मैंने अपनी नींदें बेच, कुछ ख्वाब खरीदे थे। रख दिया था सहेज कर, उन्हें अपनी पलकों तले। वक़्त की बारिशों औ आंधी से, कुछ उड़ गए, कुछ बह गए। कुछ को बचाया जतन...
    • - गज़ल 1 मुहब्बत से रिश्ता बनाया गया उसे टूटते रोज पाया गया मुहब्बत पे उसकी उठी अँगुलियाँ सरे बज़्म रुसवा कराया गया यहाँ झूठ बिकता बड़े भाव पर मगर सच को ठेंगा द...
    • माँ तुझे प्रणाम - *माँ तुझे प्रणाम* *शत शत नमन कोटि प्रणाम * *माँ तुझे प्रणाम ।* *जब मैं तेरी कोख में आई * *तूने स्पर्श से बताया था * *ममता का कोई मोल नहीं * *तूने ही सि...
    • जाने कहाँ गया वो दिन??? - "आज कुछ special बना दो, Sunday है... " ... अभी तो परसों कढ़ाही पनीर बनी थी... "सुनो, मैं अपने दोस्तों से मिल कर आ रहा हूँ, वो आज Sunday है न..." ... हाँ, द...
    • अधूरे हम... - एक युवक बगीचे में खिन्न मुद्रा में बैठा था । एक बुजुर्ग ने उस परेशान युवक से पूछा - क्या हुआ बेटा क्यूं इतने परेशान हो ? युव...
    • नया साल ! - समर घर से निकला तो पत्नी और बच्चों के लिए गिफ्ट पहले ही खरीदता हुआ होटल पहुंचा था। रात में प्रोग्राम ख़त्म करके सीधे घर भागेगा क्यो...
    • वेदों में गायन कला - *- डॉ. शरद सिंह* *गायन मानव की संवेदनाओं को जागृत करता है.आज दुनिया भर में संगीत के महत्व पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं . पाश्चात्य जगत के व...
    • भ्रष्ट आचार - स्वतंत्र भारत की नीव में उस समय के नेताओं ने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं के रख दिये थे भ्रष्ट आचार फिर देश से कैसे खत्म हो भ्रष्टाचार ?
    • उदास आँखों में छुपी झुर्रियों की दास्तान (भाग -9) - *(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे,अपना पुराना जीवन याद करने लगती > हैं.उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति गाँव के स्कूल में > ...

    मन की दुनिया

    नारी का पूर्ण सशक्तिकरण

     
    Copyright (c) 2010 प्यारी माँ. All rights reserved.